कारपोरेट संचालन

कंपनी संचालन, निगम के नियम,प्रक्रिया तथा निर्विवादिय नियम जो कॉर्पोरेशन के सूचनापरक प्रबंधकीय निर्णय लेने में सहयोग करता है तथा साथ ही साथ विषेश कर अपने साझेदारों, अपने अंशधारी, ऋणदाता,ग्राहकों, राज्‍य तथा कर्मचारियों के हित से संबंध रखता है । नीपको प्रबंधन हर समय अपने साझेदारों के हित में काम करता है तथा व्‍यापक साझेदारों के हित के लिए एक अच्‍छी कारपोरेट प्रचालन प्रक्रिया को अपनाया है।

संचालन कोड के सिद्वांत

(क)  संचालन प्रणाली पर सुदृढ़ नियंत्रण तथा पारदशीय रूप में बोर्ड को समय से सूचना उपलब्‍ध करना ताकि कार्य निष्‍पादन पर बोर्ड नजर रख सके और प्रबंधन को जबाब देह बना सके ।

(ख)  व्‍यापक रूप से पूरे देश तथा खास कर उद्यम के संपति को बढ़ाने के लिए निगम के व्‍यवसाय को प्रभावी रूप से बढ़ाना।

(ग)  कारपोरेट गरिमा को बनाए रखने तथा उसे अपने व्‍यवहार में लाने के लिए कर्मचारियों तथा बोर्ड के योगदान को सुनिश्चित करना ।

1.बोर्ड की संरचना तथा निदेशको का विवरण:

(I) बोर्ड का गठन

निगम का निदेशक मंडल (बोर्ड), 11 (ग्यारह) निदेशकों का है, जिसमें 04 (चार) पूर्णकालि‍क निदेश, 01 (एक) भारत सरकार का प्रतिनिधित्‍व करने वाले अंशकालि‍क सरकारी निदेशक, 01 (एक) पूर्वोत्‍तर राज्‍य के सरकारों के प्रतिनिधित्‍व करने वाले अंशकालिक सरकारी निदेशक तथा 05 (तीन) स्‍वतन्‍त्र निदेशक है ।(तीन) स्‍वतन्‍त्र निदेशक ।

(।।) गैर-कार्यकारी निदेशक का मुआवजा और खुलासे:

निगम गैर कार्यपालक स्‍वतंत्र निदेशकों को बैठक शुल्‍क (सिटिंग फीस) भुगतान करता है ।

(।।।) बोर्ड की बैठकें, समिति की बैठकें तथा प्रक्रिया

(क)  प्रत्‍येक वर्ष कम से कम चार बोर्ड की बैठकें आयोजित की जाती है इन चार निर्धारित बैठकों के आलावा उपयुक्‍त सूचना देकर अतिरिक्‍त बैठक भी बुलाई जा सकती है। कार्य की आवश्‍यकता तथा मामले के महत्‍व के अनुसार परिपत्र के जरिए संकल्‍प पारित किया जाता है।

(ख)  प्रत्‍येक बोर्ड बैठक में परियोजना के कार्यान्‍वयन तथा निगम के संचालन संबंधी मामलें को निदेशक मंडल के समक्ष प्रस्‍तुत किया जाता है । सूचनाओं को डीपीई दिशा निर्देश के तहत बोर्ड के समक्ष रखा जाता है । वर्ष के प्रत्‍येक तिमाही में कम से कम बोर्ड की एक बैठक रखी जाती है ।

(ग) निदेशक मंडल, कंपनी सचिव द्वारा प्रस्‍त्‍तुत किए गये वि‍धिक अनुपालन रिपोर्ट को भी समय-समय पर समीक्षा करती है ।

2. आचरण कोड

निगम वाणिज्‍य के उच्‍चतम नैतिक नियम आचरण को अपनाते हुए व्‍यवसाय करने के लिए बचनबद्ध है तथा इसके लिए व्‍यवहारिक नियम, नीति तथा नियमन को अपनाता है।

आचरण कोड - विवरण के लिए लिंक पर क्लिक करें ।

3. जोखिम प्रबंधन नीति

निदेशक मंडल ने दिनांक 28.6.2010 की अपनी 175वीं बैठक में जोखिम प्रबंधन नीति को स्‍वीकृति दे दी है। जोखिम प्रबंधन नीति वर्ष 2011-12 से लागू की गई।

4. बोर्ड सदस्‍यों का प्रशिक्षण

बोर्ड के सदस्‍यों को आवश्‍यक दस्‍तावेज/रिपोर्ट तथा आंतरिक नीति उपलब्‍ध कराई जाती है जिससे वे निगम की प्रक्रिया और प्रणाली से रूबरू हो सके ।

5. लेखा परीक्षा समिति

वर्ष 2001 में लेखा परीक्षा समिति का गठन किया गया । समिति वर्ष के दौरान 04 बैठकें करती है। बैठक में निदेशक (वित्‍त), आंतरिक लेखा परीक्षा के प्रमुख तथा विशेष रूप से आमंत्रित संविधिक लेखा परीक्षक भी शामिल होते हैं । समिति के सचिव के रूप में कंपनी सचिव कार्य करते हैं ।

इस लेखा परीक्षा समिति की बैठक के कार्यवत्‍त को बोर्ड के समक्ष सूचना के लिए प्रस्‍तुत किया जाता है । समिति के कार्यक्षेत्र निम्‍नवत शर्तें हैं :

(क)  लेखा विवरणों को प्रर्याप्‍त, सही तथा विश्‍वसनीय बनाने के लिए कॉर्पोरेशन के वित्‍‍तीय प्रस्‍तुतीकरण प्रकिया तथा वित्तीय रिपोर्ट में दिए गए व्‍यय की समीक्षा करना।

(ख)  बोर्ड के समक्ष प्रस्‍तुत करने से पहले निम्‍नलिखित बातों का विशेष ध्‍यान रखते हुए अर्द्व-वार्षिक तथा वार्षिक वित्‍तीय विवरणों की समीक्षा की जाती हैं ।

          (I) लेखाविधि नीति और प्रचलन में किसी भी प्रकार के बदलाव

          (।।) निर्णय लेने के अधिकार के तहत प्रबंधन द्वारा विशेष लेखाविधि प्रविष्टियां

          (।।।) रारूप लेखा परीक्षा रिपोर्ट में अर्हताएं

          (।v) वित्तीपय विवरण से संबंधित सभी विधिक आवश्यवकताओं का निर्वाहन

(ग) आंतरिक नियंत्रण प्रणाली की अनुषंगिकता की समीक्षा

(घ) आंतरिक लेखा परीक्षा की कायप्रणाली, विभाग का ढ़ॉंचा, विभाग की सदस्‍य, प्रस्‍तुतीकरण ढ़ॉंचा तथा आंतरिक लेखा परीक्षा के क्षेत्र व आवृत्ति सहि‍त आंतरिक लेखा परीक्षा के कार्य प्रक्रिया के अनुषंगिक्‍ता की समीक्षा.

(ड़) लेखा परीक्षा शुल्‍क (ऑडिट फीस) के निर्धारण हेतु सुझाव तथा कंपनी (संशोधन) नियम, 2000 कंपनियां (संशोधन) अधिनियम, के तहत धारा 224 (8) (ए ए) में कि‍ए गए संशोधन के अनुसार वाह्य लेखा परीक्षकों से लिए गए अन्‍य सेवाओं के लिए भुगतान को भी मंजूरी प्रदान करना ।

(च) कंपनी नियम की धारा 233 बी के तहत लागत लेखा परीक्षक की नियुक्ति तथा पारिश्रमिक तय करना

(छ) किसी विशेष निर्णय पर आंतरिक लेखा परीक्षकों से परामर्श करना तथा इस पर अनुवर्ती कार्रवाई करना

(ज) कोई भी आंतरिक जॉंच द्वारा उजागर किए गए किसी भी संदेहात्‍मक, धोखा धड़ी या अनियमितता या आंतरिक नियंत्रण प्रणाली की विफलता संबंधी मामलों की आंतरिक लेखा परीक्षकों द्वारा समीक्षा करना तथा बोर्ड को इसकी सूचना देना ।

(झ) लेखा परीक्षा आरंभ होने से पहले लेखा परीक्षा का स्‍वरूप और क्षेत्र पर बाह्य लेखा परीक्षक से विचार विमार्श तथा पाई गई खामियों पर यदि हो, बाद में चर्चा करना ।

(ज्ञ) निगम के वित्‍तीय तथा जोखिम प्रबंधन नीति का समीक्षा करना ।

6. निदेशकों का पारिश्रमिक

कंपनी के एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, नियुक्ति, कार्यकाल और निदेशकों के पारिश्रमिक जा रहा है भारत के राष्ट्रपति द्वारा निर्णय लिया जाता है।  इसलिए, बोर्ड निदेशकों के पारिश्रमिक का फैसला नहीं करता है स्वतंत्र निदेशकों को बोर्ड बैठकों और साथ ही समिति की बैठक में भाग लेने के लिए बोर्ड द्वारा तय दर पर केवल बैठे फीस का भुगतान किया जाता है।  11.06.2013 में बोर्ड और समितियों की बैठकों में भाग लेने के लिए बैठे शुल्क को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये  कर दिया गया है।

7. अनावृति (डिसक्‍लोजर्स)

भारत के चाटर्ड एकाउंटेन्‍ट संस्‍थान द्वारा जारी लेखाविधि मानक – 18 के अनुसार संबंधित पक्ष के अनावृति का विवरण लेखा में नोट लिखे जानेवाले भाग में शा‍मिल किया गया है । कंपनी नियम के प्रावधानों तथा रेगुलेटरी अथोरिटी (नियामक प्राधिकरण) के मार्गदर्शी सिद्वांतों को लेकर चलती है ।

8. आम बैठक

किसी भी वार्षिक आम बैठक की तिथि, समय तथा स्‍थान का निर्धारण एक आंतरिक विषय है जो निगम के नियम (कंपनी एक्‍ट) तथा निगम के अंतर्नियम के तहत की जाती है ।

9. अशेधारी संबंधी सूचना

नीपको एक भारत सरकार के संपूर्ण स्‍वामित्‍व वाला उद्यम है तथा भारत सरकार के राष्‍ट्रपति और इसके नामिती निगम के 100% शेयर के भागीदार हैं । अत: शेयर वितरण का कोई भी मापदण्‍ड नहीं दर्शाया गया है।