उत्तर पूर्वी राज्यों की विद्युत शक्यता

आखिरी अपडेट: 04/08/2017

जल विद्युत के क्षेत्र में उत्तर पूर्वी राज्यों की शक्यता लगभग 58971 मेगावाट है जो कि पूरे देश की जल विद्युत शक्यता का लगभग 40% है। इसके अतिरिक्त, इन राज्यों के पास ताप विद्युत उत्पन्न करने के लिये कोयला, तेल तथा गैस के प्रचूर संसाधन उपलब्ध है। इतनी विशाल क्षमता होने के बावजूद देश की तुलना में प्रति व्यगक्ति ऊर्जा खपत सबसे कम है। इसका मुख्य् कारण विकट जलवायु परिस्थितियॉ, दूरस्थम अवस्थिति तथा भौगोलिक स्थिति की अगम्यमता का होना है।

आधारभूत संरचना तथा संचार सुविधा में निरंतर विकास कर पूर्वोत्तार क्षेत्र अपनी विशाल विद्युत शक्यतता विशेष कर जल क्षेत्र का विकास कर भारत का विद्युत गृह बनने के पथ पर अग्रसर है।

जल विद्युत :

पूर्वोत्तर क्षेत्र विशाल जल शक्य ता से समृद्ध है जो कि अनुमानतः 58971 मेगावाट है जिसमें से फरवरी 2016 तक 1242 मेगावाट (करीब 2.1 %) का ही दोहन किया गया है। इसके अतिरिक्त 2954 मेगावाट जल-विद्युत उत्पादन का कार्य निर्माणाधीन है। शेष 93% (तिरानवे प्रतिशत) का दोहन करना अभी भी बाकी है।

प्राकृतिक गैस :

151.68 विलियन है जो कि 10 वर्षो तक 7500 मेगावाट बिजली उत्पन्न करने की क्षमता रखता है।

कोयला :

देश में सुरक्षित 186 बिलियन टन की तुलना में 864.78 मिलियन टन पूर्वोत्तर में उपलब्ध है। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में कोयले के इस सुरक्षित भण्‍डार से 100 वर्षो तक लगभग 240 मेगावाट/प्रतिदिन उत्पादन किया जा सकता है।