उत्तर पूर्वी राज्यों की विद्युत शक्यता

आखिरी अपडेट: 07/05/2019

जल विद्युत के क्षेत्र में उत्तर पूर्वी राज्यों की शक्यता लगभग 58971 मेगावाट है जो कि पूरे देश की जल विद्युत शक्यता का लगभग 40% है। इसके अतिरिक्त, इन राज्यों के पास ताप विद्युत उत्पन्न करने के लिये कोयला, तेल तथा गैस के प्रचूर संसाधन उपलब्ध है। इतनी विशाल क्षमता होने के बावजूद देश की तुलना में प्रति व्यगक्ति ऊर्जा खपत सबसे कम है। इसका मुख्य् कारण विकट जलवायु परिस्थितियॉ, दूरस्थम अवस्थिति तथा भौगोलिक स्थिति की अगम्यमता का होना है।

आधारभूत संरचना तथा संचार सुविधा में निरंतर विकास कर पूर्वोत्तार क्षेत्र अपनी विशाल विद्युत शक्यतता विशेष कर जल क्षेत्र का विकास कर भारत का विद्युत गृह बनने के पथ पर अग्रसर है।

जल विद्युत :

नॉर्थ ईस्टर्न क्षेत्र में लगभग 5897 मेगावाट की विशाल जल-विद्युत शक्यता है, जिसमें से 1427 मेगावाट (लगभग 2.4%) का ही फरवरी, 2019 तक दोहन हो सका है। अन्य 2600 मेगावाट जल-विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य चल रहा है। शेष 93.17% का दोहन बाकी है। नॉर्थ ईस्टर्न क्षेत्र की स्थापित जल-विद्युत क्षमता में नीपको का योगदान 925 मेगावाट यानी लगभग 65% का है।

प्राकृतिक गैस :

151.68 विलियन है जो कि 10 वर्षो तक 7500 मेगावाट बिजली उत्पन्न करने की क्षमता रखता है।

कोयला :

देश में सुरक्षित 186 बिलियन टन की तुलना में 864.78 मिलियन टन पूर्वोत्तर में उपलब्ध है। पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में कोयले के इस सुरक्षित भण्‍डार से 100 वर्षो तक लगभग 240 मेगावाट/प्रतिदिन उत्पादन किया जा सकता है।