वाणिज्यिक क्रियाकलाप

आखिरी अपडेट: 09/02/2018

वाणिज्यिक विभाग

कारपोरेट मुख्‍यालय का वाणिज्य विभाग मूलरूप से टैरिफ व राजस्‍व से संबंधित मामलों के अतिरिक्‍त समय-समय पर उत्‍पन्‍न होने वाले मामलों से संबंधित कार्यों का निष्‍पादन करता है। इसे केंद्रीय विद्युत विनियमन समिति (सीईआरसी) द्वारा निर्धारित टैरिफ विनियमों के अनुसार निगम के प्रचालनाधीन विद्युत स्‍टेशनों के लिए टैरिफ पेटिशन तैयार करने का दायित्‍व दिया गया है।

वाणिज्य विभाग के अन्य महत्वपूर्ण कार्य इस प्रकार हैं –

  • आपूर्ति की गई विद्युत के लिए बिल तैयार करना तथा राजस्‍व की वसूली करना।
  • विद्युत लेखा खातों का मेल-मिलाप करना।
  • प्रचालनाधीन विद्युत स्‍टेशनों के लिए थोक विद्युत आपूर्ति समझौताओं को तैयार करना,समझौता करना तथा हस्‍ताक्षर करना।
  • आगामी विद्युत परियोजनाओं के लिए विद्युत क्रय समझौता तैयार करना, तोल-मोल करना तथा हस्‍ताक्षर करना।
  • टैरिफ तथा राजस्‍व के मसलों पर विद्युत मंत्रालय (एमओपी), पूर्वोत्तर क्षेत्रीय ऊर्जा समिति(एनईआरपीसी), नॉर्थ ईस्टर्न रिजनल लोड डिस्पैच सेंटर (एनईआरएलडीसी), हिताधिकारी राज्‍य/राज्‍य विद्युत बोर्ड, केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण तथा अन्‍य विद्युत क्षेत्र के अन्य संघटकों से समन्‍वय बनाए रखना।
  • बिक्री और प्राप्ति का लिखित लेखा-जोखा रखना।

वाणिज्यिक प्रचालन संबंधी उपलब्धियॉ :

  • नीपको ने 250 मेगावाट कोपिली जल-विद्युत परियोजना के साथ जल-विद्युत उत्‍पादन का कार्य आरंभ किया जिसका वाणिज्यिक उत्‍पादन 1984 में इसके खांडोग विद्युत स्‍टेशन से आरंभ हुआ।
  • असम राज्‍य में नीपको ने प्रथम गैस आधारित विद्युत परियोजना (291 मेगावाट) का वर्ष 1995 में सफलता पूर्वक परिचालित कर ताप विद्युत (गैस आधारित) उत्‍पादनकर्ता के परिदृश्‍य में शामिल हुआ।
  • त्रिपुरा राज्‍य में दूसरा गैस आधारित विद्युत परियोजना, नामानुसार अगरतला गैस टरबाइन परियोजना (84 मेगावाट) का परिचालन वर्ष 1998 में किया गया।
  • दूसरा जल-विद्युत परियोजना, नामानुसार दोयांग जल-विद्युत परियोजना (75 मेगावाट) जो नागालैंड राज्‍य में है, का परिचालन वर्ष 2000 में किया गया।
  • अरूणाचल प्रदेश में रंगानदी जल-विद्युत परियोजना (405 मेगावाट) जो नीपको की तीसरी जल-विद्युत परियोजना है, का परिचालन वर्ष 2002 में किया गया।

नीपको के हिताधिकारी :

नीपको के उत्‍पादन करने वाले स्‍टेशन :

क्र.सं. विद्युत स्‍टेशन अधिष्‍ठापित क्षमता (एमयू) वाणिज्यिक उत्‍पादन तिथि (अंतिम यूनिट चालू करने का)
1 कोपिली विद्युत स्‍टेशन 2X25=50 04.05.1984
2 खांडोग विद्युत स्‍टेशन 4X50=200 12.07.1997
3 कोपिली जल-विद्युत चरण -।। 1X25=25 26.07.2004
4 डीएचईपी 3X25=75 10.07.2000
5 आरएचईपी 3X135=405 12.04.2002
उप-जोड़ (जल) 755
6 एजीटीपीपी 4X21=84 01.08.1998
7 एजीबीपीपी 3x33.5+3x30=291 01.04.1999
उप-जोड़ (ताप) 375
कुल जोड़ 1130

नोट: डोग तथा कोपिली विद्युत स्‍टेशन, कोपिली जल-विद्युत परियोजना के ही भाग हैं जिसे भारत सरकार ने कोपिली जल-विद्युत परियोजना चरण-Iविस्‍तार को भी शामिल करते हुए एक ही परियोजना के रूप में स्‍वीकृत किया था। सीईआरसी अधिनियम के तहत दो भागों में दरों को समावेश करने के फलस्‍वरूप परियोजना को दो अलग-अलग उत्‍पादन स्‍टेशनों में बॉटा गया। कोपिली जल-विद्युत परियोजना ।। विस्‍तार को बाद में अनुमोदित किया गया तथा इसे एक अलग विद्युत स्‍टेशन के रूप में रखा गया। इस तरह दोयांग और रंगानदी जल-विद्युत परियोजनाओं को शामिल करते हुए तीन जल-विद्युत परियोजनाओं का निर्माण किया जिसमें 05 जल-विद्युत उत्‍पादन स्‍टेशन हैं।

नीपको के हिताधिकारी:

  • असम राज्‍य विद्युत बोर्ड।
  • मेघालय एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड।
  • त्रिपुरा राज्‍य विद्युत कॉर्पोरेशन लिमिटेड।
  • विद्युत विभाग, अरूणाचल प्रदेश सरकार।
  • विद्युत विभाग, मणिपुर सरकार।
  • ऊर्जा व विद्युत विभाग, मिजोरम सरकार।
  • ऊर्जा विभाग, नागालैंड सरकार।

विद्युत आपूर्ति की मुख्‍य विशेषताएं :

  • नीपको के उत्‍पादन स्‍टेशन अपने संबंधित बुस-बार तक विद्युत आपूर्ति कर क्षेत्रीय ग्रिड को देता है।
  • पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पीजीसीआईएल) के साथ-साथ राज्‍य पारेषण संघटकों (एसटीयू) के पारेषण प्रणाली के माध्‍यम से थोक विद्युत ग्राहकों को विद्युत पारेषण करता है।
  • इस क्षेत्र में विद्युत का उत्‍पादन तथा पारेषण एनईआरपीसी तथा एनईआरएलडीसी के विनियम के तहत होती है, जिसे एकीकृत प्रचालन तथा क्षेत्रीय विद्युत प्रणाली (क्षेत्रीय ग्रिड) के प्रबंधन का उच्‍चतम इकाई का दर्जा दिया गया है।
  • ग्रिड के ऐसे संघटक अर्थात उत्‍पादक तथा हिताधिकारी जो अंतिम शेड्यूल से मुकर जाते है, के ऊपर अनशेड्यूल इंटरचार्ज (यूआई) शुल्‍क लगाया गया है।

विद्युत आपूर्ति की मुख्‍य विशेषताएं :

  • नीपको द्वारा हिताधिकारियों के साथ किया गया थोक विद्युत आपूर्ति समझौता/विद्युत क्रय समझौता पर किया गया हस्‍थाक्षर अनुसार विद्युत की ब्रिकी आधारित है।
  • उत्‍पादन स्‍टेशनों से हिताधिकारियों को विद्युत का आबंटन समय-समय पर विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जाता है। दिन-प्रतिदिन के उत्‍पादन शेड्यूल तथा विद्युत की निकासी का निर्धारण एनईआरएलडीसी द्वारा किया जाता है।
  • हि‍ताधिकारियों को उपलब्‍ध कराया गया विद्युत के लिए एनईआरपीसी द्वारा क्षेत्रीय ऊर्जा लेखा (आरईएएस) के आधार पर जारी किए गए बिल प्रत्‍येक माह उन्‍हें दिया जाता है।
  • प्रत्‍येक विद्युत स्‍टेशन के टैरिफ आदेश अनुसार तथा सीईआरसी के नियम एवं शर्तों के तहत वाणिज्यिक विभाग केंद्रीय रूप से बिल तैयार करता है।
  • हितकारियों से देयता की वसूली सीईआरसी के संबंध विनियमनों के साथ-साथ भारत सरकार,भारतीय रिजर्व बैंक तथा संबंधित राज्‍य सरकारों के बीच त्रिपक्षीय समझौता (टीपीएएस) के अनुसार किया जाता है।
  • भुगतान की प्राप्ति मुख्‍य रूप से हिताधिकारियों द्वारा जारी नीपको के पक्ष में रिभोल्विंग और इरिभोकेवल लेटर ऑफ क्रेडिट के माध्‍यम से होता है। अतिरिक्‍त भुगतान (जैसे पूरक बिल अधिशुल्‍क इत्‍यादि) की प्राप्ति हिताधिकारियों द्वारा जारी चैक के माध्‍यम से होता है।
  • सीईआरसी के विनियमों तथा टीपीए के शर्तों अनुसार छूट तथा अधिशुल्‍क की गणना की जाती है।

उपलब्‍धता के आधार पर टैरिफ :

पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में उपलब्‍धता के आधार पर टैरिफ (एबीटी) 01.11.2003 से क्रियान्वित हुआ। एबीटी के अनुसार, उत्‍पादनकर्त्‍ता को प्रतिदिन के अपने उत्‍पादन उपलब्‍धता को आरएलडीसी को उपलब्‍ध कराने होंगे जिसका संचालन वर्तमान में पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड करता है। इसी एवज में हिताधिकारियों की अपनी आवश्‍यकता आरएलडीसी को देनी होगी। आरएलडीसी अंतिम रूप में उत्‍पादन तथा आबंटन योजनाएं तैयार कर उत्‍पादकों तथा संबंधित हिताधिकारियों को आगे की कार्रवाई हेतु देता है।

टैरिफ निर्धारण प्रणाली :

  • प्रत्‍येक उत्‍पादन स्‍टेशन का अपना अलग टैरिफ है।
  • सीईआरसी के संबंधित सीईआरसी विनियमनों के तहत टैरिफ का निर्धारण किया जाता है।
  • वार्षिक क्षमता चार्ज (एसीसी) तथा विद्युत चार्ज (ईसी) के अनुसार टैरिफ होती है।
  • एसीसी की गणना वार्षिक नियत चार्ज (एएफसी) के आधार पर की जाती है। जल-विद्युत स्‍टेशनों के लिए एएफसी तथा वार्षिक डिजाइन ऊर्जा के आधार पर एसीसी की गणना की जाती है, जबकि ताप स्‍टेशनों के लिए ईंधन पर आये वास्‍तविक खर्च के आधार पर किया जाता है।

वार्षिक नियत चार्ज (एएफसी) से निम्‍नलिखित संघट जुड़े होते हैं :

  • ऋण पर ब्‍याज।
  • मूल्‍यहृास।
  • लाभांश ।
  • कार्यशील पूँजी पर ब्‍याज।
  • ओ एण्‍ड एम खर्च।

सीईआरसी (टैरिफ के नियम एवं शर्तें) अधिनियम,2009 जल तथा ताप दोनों ही प्रकार के स्‍टेशनों के लिए क्षमता चार्ज और विद्युत चार्ज की गणना के लिए मानको तथा प्रणालियों का स्‍पष्‍टीकरण देता है। इसकी कुछ विशेषताएं निम्‍नवत है :

  • यह वर्तमान टैरिफ अवधि 2009-2014 के लिए मान्‍य होगी।
  • प्रत्‍येक उत्‍पादन स्‍टेशन का प्रारंभिक वार्षिक संयंत्र उपलब्‍धता घटक का विनिर्दिष्‍ट किया गया है।
  • एएफसी को एनएपीएएफ से वास्‍तविक संयंत्र उपलब्‍धता घटक (पीएएफ) के अनुपात में प्रतिलभ्‍य किया जा सकता है।
  • किसी भी अवधि के पीएएफ का अर्थ होता है उस अवधि के दौरान सभी दिनों के लिए उल्‍लेखित किए गए मेगावाट (डीसीएस) में अधिष्‍ठापित क्षमता के प्रतिशत में से नॉर्मेटिव ऑक्जिलरी एनर्जी खपत का घटाने से है।
  • जल स्‍टेशनों के मामले में एएफसी का 50 प्रतिशत क्षमता शुल्‍क के रूप वसूल किया जाता है तथा शेष 50 प्रतिशत ऊर्जा शुल्‍क के रूप में।
  • ताप स्‍टेशनों के मामलो में, एएफसी के अलावा नॉर्मेटिव हीट रेट तथा ईंधन पर हुए खर्च के आधार पर ईंधन शुल्‍क की वसूली की जाती है।
  • समय-समय पर सीईआरसी द्वारा यूआई दर के लिए अलग-अलग आदेश जारी किया जाता है।

नीपको के सभी उत्‍पादन स्‍टेशनों का वर्तमान टैरिफ अवधि 2009-14 के लिए सीईआरसी को पेटिशन प्रस्‍तुत कर दिया गया है। सीईआरपी अधिनियम,2009 के अनुसार नई टैरिफ अवधि के लिए टैरिफ आदेशों को अंतिम न किए जाने तक गत वर्ष के लिए पहले की टैरिफ अवधि अर्थात 2008-09 के लिए सीईआरसी द्वारा दिए गए टैरिफ आदेशों का ही बिल तैयार करने में अनंतिम तौर से पालन किया जाएगा।